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Showing posts with the label संस्कृति और परम्परा

नया वर्ष के नाम पत्र

 नवका साल के नामे चिट्ठी  प्रिय नवका साल  सादर प्रणाम      का हो साल तू केतना जल्दी बीत गईला कुछ समझ में ना आइल लोग कहत रहलन की साल दर साल उमर बढ़त गईल लेकिन , हम त कहत बानी की उमर बढ़ल त ना घट गईल , बाकि प्रकृति क नियम ह की क्षतिपूर्ति जरुर करे ले उमर त घटल बाकि अनुभव बढ़ गईल | लोगन के चेहरा पढ़े क हुनर भी मिलल , कुछ लोग कहलन की तू बदल गईला हमके त न बुझाइल की हम बदल गइनी लेकीन ह , इ जरुर कहब की समय की बदलत नब्ज़ के हम ना नकार पवनी आ , दायित्व निभावे में हम एइसन अंझुरा गइनी की बदलाव समझे ही ना पवनी आ धीरे -धीरे बाल आ खाल के रंग भी बदले लागल | लेकिन ,समय अइसन मुट्ठी से सरकल की कुछ समझे ना आइल | लोग सबेरे से कहे शुरु कइलन की हैप्पी न्यू ईयर , अब हम उनके का बताईं की हैप्पी त लोग तब होखेला जब अपना साथ कुछ बढ़िया होखे ला , हम का बताई खाली भर , बरिस   के पीछे क अंक बदले पर एतना हल्ला मचत बा - की का बताईं , इ खाली बाजार आ टीबी अउर व्हाट्स अप्प विश्व विद्यालय क फइलावल रायता ह , सरकार के भी फायदा बा -लोग कई अरब के त मदिरा पी जात बा...

ख्यातिलब्ध चिकित्सक के पिता और एक शिक्षक का परिनिर्वाण

।                       स्व०कुमर किशोर जी  कुशल शिक्षक व कबीर विचार सेवी का परिनिर्वाण  बिहार मधेपुरा के एक छोटे से गांव में जन्मे पले -बढ़े "कुमर किशोर "जी शिक्षक बने और  ऐसे शिक्षक जो मन ,कर्म और वचन से शिक्षक और केवल शिक्षक थे  परन्तु अपने पारिवारिक रिश्तों को उन्होंने बहुत महत्व दिया दो बेटों और दो बेटियों के लिए एक अच्छे पिता भी थे कुमर किशोर जी , सभी सामाजिक तानेबानों को मजबूती से पकड़े | परिवार बड़ा और समृद्ध था ,संयुक्त परिवार अपने आप में  समृद्धि का परिचायक है ,परन्तु ऐसा परिचय अधिक समय तक न रहा परिवार में बिखराव हुआ, सबके हिस्से अपने -अपने  संघर्ष आए और कुमर किशोर जी के हिस्से में सामाजिक न्याय का मजबूत इरादा , सामाजिक, आर्थिक संघर्ष और बेटे -बेटियों के परवरिश की जिम्मेदारी,  इस दायित्व  में बराबरी का संघर्ष था उनकी पत्नी का भी |  कुमर किशोर जी ने शिक्षक होने के साथ -साथ  एक आदर्शवादी पिता  की भूमिका भी बखूबी  निभाई | अपने बच्चों को संस्कार और पढाई में कोई ढी...

कृष्ण जन्माष्टमी और अहीर की बुद्धि

                     अहीर की बुद्धि एक किंवदंति  श्री कृष्ण जन्म जब बारह बजे रात्रि को भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ जिसे जन्माष्टमी कहा गया, जन्माष्टमी को चारो तरफ घटाटोप अंधेरा था ,एक हाथ को दूसरे हाथ की नहीं सूझ रही थी ... कंस जैसे  आसुरी प्रवृत्तियों की प्रबलता थी ,तभी प्रभु यदुकुल श्रेष्ठ श्रीकृष्ण का जन्म हुआ. .. कंस और जरासंध जैसे अत्याचारियों ने सबकी बुद्धि बंद कर दी थी , वसुदेव और देवकी को कारागार में डाल दिया था , चहुओर भय व्याप्त था तभी जन्म हुआ श्याम सलोने कृष्ण का और बुद्धि खुल गयी सभी नगर जनों (मथुरा यादवों /गोपालकों की नगरी थी) की अब लग रहा था कि मुक्ति का समय आ गया है, क्योंकि भविष्यवाणी के अनुसार कृष्ण देवकी की आठवीं  संतान थे... सम्भवतः उक्त पंक्ति तभी कही गयी कि "यादव की बुद्धि बारह बजे से काम करती है " पर समाज के मूर्ख लोगों ने उसे अपने सुविधा अनुसार प्रयोग और परिभाषित किया  | एक त्वरित रचना.......  ( कन्हैया जनम भयो )   जनम समझ लो सफल भयो , बारह बजे जो बुद्धि खुली तो , कृ...

कजरी एक लोकरस

 लोक विधाएं - लोकरस                   चित्र साभार डा० मन्नू कृष्ण की पुस्तक का आवरण पृष्ठ  लोक कलाएं आमजन की अभिव्यक्ति का प्रबल  माध्यम हैं | प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में  लोक कला का अपना अलग महत्त्व है | लोक कलाएं  केवल मनोरंजन का साधन मात्र नहीं हैं, बल्कि इनमें भाषा ,विज्ञान, इतिहास, भूगोल ,सांस्कृतिक विरासत ,सभ्यता और  जीवन की सारगर्भिता के दर्शन भी होते हैं  | लोक कलाएं  लोक अभिव्यक्ति के साथ -साथ संचार का सशक्त माध्यम हैं | लोक कलाओं में लोक गीतों का अनूठा महत्त्व है लोक गीत लोक कण्ठ से अनायास, कौमार्य और पवित्रता लिए  प्रस्फुटित होते हैं  ,लोकगीतों का उद्देश्य केवल संचार और  मनोरंजन रहा है | कोई  साहित्य  जितना लिखा  जाए उससे ज्यादा पढ़ा जाता है ,जितना पढा जाए उससे ज्यादा सुना जाता है।    जब साहित्य सुना जाए तो वह गायन विधा में हो तो कर्ण प्रिय होता है ,जब कर्ण प्रिय हो तो शीघ्र ही अङ्गीकार हो जाता है |  इसलिए हमने लोकगीत /लोक कला (कजरी ,फगुआ,बिरहा ,च...

कारगिल विजय के हीरो परमवीर योगेन्द्र

 कारगिल विजय के हीरो  कारगिल युद्ध के रियल हीरो सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह, ने ही तो छुड़ाए थे पाकिस्तानियों के छक्के | कारगिल युद्ध (Kargil war) के हीरो सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव  को उनकी सराहनीय सेवा और भारतीय सेना में योगदान के लिए 75 वें स्वतंत्रता दिवस (75th Independence day) की पूर्व संध्या पर कैप्टन रैंक की उपाधि से नवाजा गया  | कौन हैं योगेन्द्र यादव  कौन है कारगिल युद्ध  रियल हीरो  सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह, इस तरह छुड़ाए थे दुश्मनों के छक्के | परमवीर चक्र (Param Vir Chakra) से सम्मानित सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव   भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने  अपरिमित साहस और बहादुरी के साथ देश की सुरक्षा के लिए अहम योगदान दिया था।  इस योगदान के लिए सूबेदार मेजर यादव को 19 साल की उम्र में ही देश के सबसे बड़े सैन्य सम्मान  परमवीर चक्र से नवाजा  गया ।  आइए आज जानते हैं , इस परमवीर जवान की कहानी के बारे में... 1999का कारगिल युद्ध -- 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान सूबेदार मेजर योगेंद्र...

होली 2023के मायने होली 2022 के सापेक्ष

 होली 2023 की तिथि (Holi 2023 Date ) होली का त्यौहार  रंग ,रंगने वाले  और  भींगने वाले तीनों की सरसता ,समरसता,  प्रेम में  सराबोर होने ,एकाकार  होने का पर्व  है |  इस पर्व में  रंग और  गुलाल तो प्रतीक मात्र हैं  , रंगना और  भींगना तो प्रेम में  होता है  | यह भारतीय संस्कृति की  विविधता (रंग-बिरंगा )में  एकता का प्रतीक है | उस दिन सभी लोग सारे बैर भाव भूलकर  एक दूसरे से प्रेम पूर्वक मिलते हैं | हालांकि अब इस परम्परा में गिरावट आई है परन्तु अभी भी यह चल रहा है।  इस बार की होली 2023 की तिथियां कुछ इस प्रकार  हैं | होलिका दहन - फाल्गुन शुक्ल तिथि  14 (6 मार्च) काशी में होली - फाल्गुन शुक्ल तिथि 15 पूर्णिमा (7 मार्च ) काशी से अन्यत्र होली - रंगोत्सव चैत्र कृष्ण तिथि  प्रथमा (8मार्च) बुढ़वा मंगल (काशी)- चैत्र  कृष्ण  तिथि  सप्तमी (14मार्च) इन तिथियों  के सत्यापन हेतु देश काल और  स्थानीयता के अनुरूप  पांचांग देंखें | होली  2022की तिथि (Holi 2022 Date ...

बनारस को जानना है तो बनारस की होली जानें

 बनारसी होली  बनारस को भारत की सांस्कृतिक राजधानी होने का वैभव प्राप्त  है | होना भी चाहिए  धर्म और संस्कृति का जितना  पांडित्य यहां  है उतना अन्यत्र नहीं  | सम्पूर्ण देश  में कहीं कोई सनातनी अनुष्ठान अथवा संस्कार या कर्मकांड कराने हो तो बनारस का महत्त्व बढ़ जाता है | सात वार और नौ त्यौहारी नगरी  एक प्रचलित कहावत है - काशी का अद्भुत  व्यवहार, सात वार नौ त्यौहार | अर्थात सप्ताह में  अगर सात दिन  हैं  तो उसमें से  नौ त्यौहार, अनुष्ठान और  व्रत में  ही बीत जाएंगे  |  उसमें भी अगर आप कुछ दिन कासी प्रवास कर लें और  आपकी अर्धांगिनी कुछ अधिक धर्मपरायण हों तो  यकिन मानिए इन त्यौहारों में  खर्चते - खर्चते स्वयं खर्च हो जाने अर्थात  करोड़पति की भी लुटिया डूबने की नौबत आ जाती है | परन्तु  काशी वासियों को इस बात पर गर्व रहता है कि बनारस के अलावा  भारत के किसी भी कोने में  इतने प्रेम और  सौहार्द से इतने अधिक त्यौहार नहीं मनाए जाते | भले ही उनका रूप  साधारण  हो उ...

चुनाव में हिन्दू होता हूँ दलित हूँ साहब के मायने

एक दलित व्यथा को मुखरित करती कविता   एक    अज्ञात गुमनाम से  कवि बच्चा लाल 'उन्मेष'  ने एक कविता लिखी कविता  है 'छिछले प्रश्न गहरे उत्तर'. बच्चा लाल 'उन्मेष'     बच्चा लाल ने कविता लिखी और सोशलमीडिया पर कविता वायरल होने लगी परन्तु कौन सी लोकतांत्रिक प्रेरणा उस कविता को सोशलमीडिया से हटाने को प्रेरणा देती है , वह कविता कुछ घंटे बाद उस साइट से हटा ली जाती है |       उन्मेष जी ने जमीनी हकीकत को कुछ शब्दों में पिरोकर प्रस्तुत किया है और वे पंक्तियाँ अब भी समाज में चीख़ - चीख़ कर कह रही हैं कि हम अभी समता से दूर हैं |   छिछले प्रश्न- क्या खाते हो भाई?  “जो एक दलित खाता है साब!”  नहीं मतलब क्या-क्या खाते हो?  आपसे मार खाता हूं  कर्ज़ का भार खाता हूं  और तंगी में नून तो कभी अचार खाता हूं साब!  नहीं मुझे लगा कि मुर्गा खाते हो!  खाता हूं न साब! पर आपके चुनाव में।          उपरोक्त पंक्तियों में चुनावी मौसम का बखूबी प्रदर्शन है,चाहे पंचायत चुनाव हो या विधानसभा अथवा आम चुनाव ...

गाजीपुर के गुलाब का कांटा ही तो है लार्ड कार्नवालिस का मकबरा

  गाजीपुर के गुलाब का कांटा है लार्ड कार्नवालिस का मकबरा  अगर आप ट्रेन से जाते हुए गाजीपुर को देख कर उसके वैभव और पर्यटन तथा सौन्दर्य का वर्णन करेंगे तो केवल और केवल ताड़ और झाड़ - झंखाड़  का शहर कहेंगे | गाजीपुर को जो इसके साथ व हमारे साथ अन्याय होगा |             गाजीपुर की आर्थिक और प्राकृतिक सुंदरता  तथा  गुलाब की सुगंध के मुरीद तो गोरे भी थे जो गोराबाजार बनाए और जाने के बाद हमें रटने के लिए छोड़ गए |      पर हमें भी गर्व है हमने गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के प्रवास (अपनी नव विवाहिता पत्नी के साथ सात माह गाजीपुर में रहे गुरुदेव,अपनी दो रचनाओं "मानसी " और "नौका डूबी " को मूर्त रुप गाजीपुर प्रवास में ही दिया गुरुदेव ने)को यादगार बनाते हुए गोराबाजार को विखण्डित कर रविन्द्रपुरी एक मुहल्ला ही बनाया पर बनाया तो सही | लार्ड कार्नवालिस का मकबरा शहर के पश्चिमी छोर पर खड़ा है गाजीपुर के गुलाब का कांटा, कांटा ही तो है यह लार्ड कार्नवालिस का मकबरा रहे होंगे लार्ड अपने समय के अब तो  उन तत्कालीन लार्ड्स के ड्रेस हमारे यहाँ ...

बनारस घूमने जा रहे हैं तो इन पांच बातों का ध्यान रखें

 बनारस घूमने आते समय इन बातों का रखें ध्यान बनारस में हर समय हजारों लोग बनारस Banaras घूमने आते रहते हैं और अध्यात्म तथा   ज्ञान से अभिभूत होकर लौटते हैं | परन्तु आप बिना योजना और  बिना पूर्व तैयारी के काशी  kashiआ रहे हैं  तो अधिक सम्भावना  ठगे जाने  की और  अधूरे पर्यटन के शिकार हो सकते हैं | तो इन बातों को ध्यान रखें |     स्थान विभ्रम से सावधान -                 बनारस को काशी वाराणसीvaransi नामों से भी जाना जाता है| नाम  में कोई भ्रम नहीं है| परन्तु आप रेलवे स्टेशन के लिए बनारस जाना चाहें तो पूर्व के मण्डुआडीह पहुँच जाएंगे , वाराणसी जंक्शन, वाराणसी सिटी और काशी रेलवे स्टेशन भी है|    बस यात्रा का अवसान काशी  के चौधरी चरण सिंह बस अड्डे पर होगा |  एक हवाई अड्डा लालबहादुर शास्त्री अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बाबतपुर (Lalbahadur shashtri International airport varanasi )शहर से 20 किमी दूर है | सबसे व्यस्ततम रेलवे स्टेशन मुगलसराय(Mughalsarai) अब दीनदयाल उपाध्याय ...