नवका साल के नामे चिट्ठी प्रिय नवका साल सादर प्रणाम का हो साल तू केतना जल्दी बीत गईला कुछ समझ में ना आइल लोग कहत रहलन की साल दर साल उमर बढ़त गईल लेकिन , हम त कहत बानी की उमर बढ़ल त ना घट गईल , बाकि प्रकृति क नियम ह की क्षतिपूर्ति जरुर करे ले उमर त घटल बाकि अनुभव बढ़ गईल | लोगन के चेहरा पढ़े क हुनर भी मिलल , कुछ लोग कहलन की तू बदल गईला हमके त न बुझाइल की हम बदल गइनी लेकीन ह , इ जरुर कहब की समय की बदलत नब्ज़ के हम ना नकार पवनी आ , दायित्व निभावे में हम एइसन अंझुरा गइनी की बदलाव समझे ही ना पवनी आ धीरे -धीरे बाल आ खाल के रंग भी बदले लागल | लेकिन ,समय अइसन मुट्ठी से सरकल की कुछ समझे ना आइल | लोग सबेरे से कहे शुरु कइलन की हैप्पी न्यू ईयर , अब हम उनके का बताईं की हैप्पी त लोग तब होखेला जब अपना साथ कुछ बढ़िया होखे ला , हम का बताई खाली भर , बरिस के पीछे क अंक बदले पर एतना हल्ला मचत बा - की का बताईं , इ खाली बाजार आ टीबी अउर व्हाट्स अप्प विश्व विद्यालय क फइलावल रायता ह , सरकार के भी फायदा बा -लोग कई अरब के त मदिरा पी जात बा...
नई शिक्षा नीति और स्कूलों के बंद करने तथा संविलयन की संस्तुति -
नई शिक्षा नीति 2023 में बिन्दु सात कहता है
स्कूल कॉम्प्लेक्स/कलस्टर के माध्यम से कुशल संसाधन और प्रभावी गवर्नेंस कि संकल्पना को साकार करने के लिए सरकारी स्कूलों को संकुल स्तर पर संचालित किया जाए उसके पक्षीय में तर्क दिया जा रहा है कि बच्चों को कुशल शिक्षकों की टीम मिलेगी संगीत ,खेल ,कला और विशेष शिक्षकों की उपलब्धता से बच्चों के अधिगम को पर लगेगा ,इससे स्कूलों के भौगोलिक विस्तार से प्रशासनिक पहुंच और संसाधनों के साथ शिक्षक नियोजन चुनौतिपूर्ण हो जाता है |
समाधान-
नई शिक्षा नीति 2020 के नीति निर्धारकों ने बताया कम संख्या वाले और छोटे सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों तथा बच्चों का समेकन एक संकुल स्तर पर किया जाए जिससे एक संकुल विद्यालय पर स्कूल के लिए भौतिक और मानव संसाधन की आपूर्ति पर्याप्त हो सके ,जिससे बच्चों का अधिक कुशल शिक्षकों की देख- रख में समुचित संसाधनों की उपलब्धता में ,उचित परिवेश में किया जा सके |
चूक उपर्युक्त तर्क एकतरफा प्रशासनिक दृष्टि से आंके जाएं तो उपयुक्त और तर्कसंगत ज्ञात होते हैं। परन्तु इन्हे सामाजिक ताने बाने की कसौटी पर कसा जाए तो यह सरकार अक्षमता और नाकामी तथा अदूरदर्शिता के अलावा कुछ नहीं है।
स्कूल समेकन उचित नहीं -
स्कूलों का समेकन कर संकुल स्तर पर संचालित करने का निर्णय ठीक नहीं क्योंकि पूर्व में जब इन स्कूलों का निर्माण हुआ तो तत्कालीन नीति निर्धारकों का यह संकल्प था की प्रारम्भिक शिक्षा को हर बच्चे तक पहुंचाने और शिक्षा के मौलिक अधिकार को मजबूत करने के लिए आबादी के नजदीक स्कूल बने कोई भी बच्चा स्कूल के दूर होने के कारण शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे ,परन्तु इन स्कूलों में छात्र संख्या के कम होने का कारण बता कर विद्यालयों का समेकन (क्लोजर और मर्जर )की संकल्पना पर जोर दे रही नई शिक्षा नीति 2020 |
अगर विद्यालयों को संकुल स्तर पर चलाया जाने लगा तो 40 प्रतिशत अपवंचित वर्ग के बच्चों का स्कूल जाना सम्भव न हो सकेगा ,क्योंकि आज भी दलित ,पिछड़ा और अपवंचित वर्ग की 60 प्रतिशत आबादी शिक्षा के मूल्य को नहीं जानती केवल सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए बच्चों को सरकारी स्कूल भेजते हैं |
सरकारी स्कूलों में कम छात्र संख्या सरकारी अक्षमता -
सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या कम होने का आशय आबादी कम होने से तो लगाया नहीं जा सकता क्योंकि जब उन सरकारी स्कूलों की स्थापना हुई तब से जनसंख्या की बसावट में इजाफा हुआ है , परन्तु सरकारी स्कूलों में मानव संसाधन तथा भौतिक संसाधनों की कमी तथा कुप्रबंधन से छात्र संख्या में कमी आई है , इसको छिपाने और शिक्षा के प्रबंधन पर कम व्यय करने की गरज से वंचित वर्ग की अनदेखी करने के लिए नई शिक्षा नीति 2020 के निर्धारकों ने छोटे अथवा कम संख्या के स्कूलों को बंद करने अथवा समेकन करने का प्रयोग करना चाह रही है।
प्राइवेट स्कूलों की संख्या में वृद्धि सरकारी विफलता का मानक --
जिस आबादी के पास एक सरकारी पाठशाला थी ठीक उसी आबादी में प्राइवेट शिक्षण संस्थान खुले और उसमें कम पारितोषिक पर अप्रशिक्षित शिक्षकों के सहारे छात्र संख्या अधिक है उसके पास भौतिक और मानव संसाधन की गुणवत्ता तो कम है परन्तु प्रचुरता के कारण प्रबंधन ठीक रहा और सरकारी विद्यालयों की छात्र संख्या पर असर पड़ा ,
चूकि शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की प्रचुरता और प्रबलता का काम सरकारों का था जब वह विफल रहीं तो कोई भी अनुभवहीन
पूंजीपति शिक्षा की दुकान खोल कर शिक्षा का कुशल व्यापारी बन गया |
मेरा प्रयोग डमरू
समाधान -
छोटे सरकारी विद्यालयों /कम संख्या के विद्यालयों का समेकन अथवा बंद करना विकल्प नहीं है बल्कि शिक्षकों का नियोजन किया जाए सरकारी स्कूलों को साधन सम्पन्न बनाया जाए ,कुशल प्रबंधन किया जाए शिक्षा का बजट बढाया जाए ,जिससे शिक्षा का अधिकार हर बच्चे को मिल सके |

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