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गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं

गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं  अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं,   पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं।  जरूरत है सियासत की ,  लोगों  को प्रशिक्षित कर , गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं।  तुम्हारी कौम क्या है , गोत्र क्या है ,  असलीयत क्या है , बे -वजह उचारे जा रहे हैं।  सजग रहना ऐ मूल निवासियों,  तुम्हारे बीच से  ,          विभीषण निकाले जा रहे हैं। विविधता में एकता से , हलकान है सियासत , गुच्छे में बंधे विचार,  बे खौफ पसारे जा रहे हैं।  रंज , रंजिश , रंजय निरखकर , कलम से कर्ज उतारे जा रहे हैं।  अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं,   पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं।     विरंजय १८/११/२०२५

लंच बॉक्स और अंचार पराठे

  अंचार और पराठा 

                         
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एक वह भी समय था स्कूल की घंटी दूर तक सुनाई देती थी , दौड़ कर स्कूल पहुंचना और थोड़ा सा विलम्ब होने पर गेट बंद होना ,अब दोनों तरफ मुसीबत स्कूल में पिटाई और घर लौटे तो कुटाई | अब वह दौर नहीं रहा अब तो दरवाजे पर पीले रंग की  मार्कोपोलो स्कूल बस खड़ी हो जाती है और मम्मी बस्ता लेकर सहायक परिचालक (खलासी)को थमाती हैं  बच्चा स्कूल पहुंचता है |

लंच बॉक्स 

                
         
Source Image internet 
हमारे समय तक फाइवर (प्लास्टिक )और  स्टील के  लंच बॉक्स (टिफिन ) चलन में आ गये थे | मेरी फटी कमीज यह भी पढें
मध्यावकाश के समय टिफिन खुलते ही अंचार की खुश्बू पूरे वातावरण में घुलने लगती और  जहां तक पहुंचती लोगों के मुंह में पानी आ जाता  जो अपने टिफिन में सब्जी भी लाया होता उसका मिजाज अंचार के लिए मचल उठता |

 लंच का मेन्यु 

लंच के मेन्यु निर्धारण में  कोई  दिक्कत न थी सामान्यता पराठे और आम अथवा मिर्चे के अचार हुआ करते थे  मध्याह्न भोजन के लिए  और  आम के अंचार की गुठली को तृप्ति के अंतिम छोर तक चूसने वाले किरदार भी हमारे समय में पाए जाते थे |

एक ही मेन्यु लगभग रोज अंचार और पराठा खाकर जो आनन्द की प्राप्ति होती वह दस व्यंजनों में भी शायद न हो और  सभी तंदरुस्त - तगड़े , बीमारी नाम की कोई चीज नहीं  ,अब के बच्चों को तो स्कूल  से डाइट चार्ट मिल रहा है और मेन्यु निर्धारित हो रही है  | मम्मी  को रात में  माथा खपाना होता है कि  बच्चे की टिफिन में सुबह क्या  स्पेशल देना है |
#यादें_बचपन 

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