नवका साल के नामे चिट्ठी प्रिय नवका साल सादर प्रणाम का हो साल तू केतना जल्दी बीत गईला कुछ समझ में ना आइल लोग कहत रहलन की साल दर साल उमर बढ़त गईल लेकिन , हम त कहत बानी की उमर बढ़ल त ना घट गईल , बाकि प्रकृति क नियम ह की क्षतिपूर्ति जरुर करे ले उमर त घटल बाकि अनुभव बढ़ गईल | लोगन के चेहरा पढ़े क हुनर भी मिलल , कुछ लोग कहलन की तू बदल गईला हमके त न बुझाइल की हम बदल गइनी लेकीन ह , इ जरुर कहब की समय की बदलत नब्ज़ के हम ना नकार पवनी आ , दायित्व निभावे में हम एइसन अंझुरा गइनी की बदलाव समझे ही ना पवनी आ धीरे -धीरे बाल आ खाल के रंग भी बदले लागल | लेकिन ,समय अइसन मुट्ठी से सरकल की कुछ समझे ना आइल | लोग सबेरे से कहे शुरु कइलन की हैप्पी न्यू ईयर , अब हम उनके का बताईं की हैप्पी त लोग तब होखेला जब अपना साथ कुछ बढ़िया होखे ला , हम का बताई खाली भर , बरिस के पीछे क अंक बदले पर एतना हल्ला मचत बा - की का बताईं , इ खाली बाजार आ टीबी अउर व्हाट्स अप्प विश्व विद्यालय क फइलावल रायता ह , सरकार के भी फायदा बा -लोग कई अरब के त मदिरा पी जात बा...
किसको बात बताऊं किससे दुखड़ा गाऊं-
किसको बात बताऊं अपनी , किससे दुखड़ा गाऊं ,
बचपन बीता कब ना जाना, ठहरी कब ये जवानी ,
सोच - सोच मैं , पहर -पहर भर आंखों में ले पानी ,
सबने अधरों के घेरों से आंका , पीर किसी ने न झांकी ,
पानी कितना गुजर गया कितना अभी है बाकी,
इतना आगे मैं निकल गया,लौट कहां अब जाऊं |
किसको बात बताऊं किससे दुखड़ा गाऊं ||
© -
Viranjay Singh Journalist
नोट - यह पीड़ा मेरी स्वयं की व्यक्तिगत और नितांत व्यक्तिगत है ,उपलब्धियों की तुला पर मेरी व्यथा-कथा को तौलोगे तो हाथ कुछ नहीं आएगा ||

अद्भुत
ReplyDeleteरहिमन निज मन की व्यथा मन ही राखो गोय,
ReplyDeleteसुन अठिलैहें लोग सब , बांटी न लैहें कोय ||