गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं, पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं। जरूरत है सियासत की , लोगों को प्रशिक्षित कर , गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं। तुम्हारी कौम क्या है , गोत्र क्या है , असलीयत क्या है , बे -वजह उचारे जा रहे हैं। सजग रहना ऐ मूल निवासियों, तुम्हारे बीच से , विभीषण निकाले जा रहे हैं। विविधता में एकता से , हलकान है सियासत , गुच्छे में बंधे विचार, बे खौफ पसारे जा रहे हैं। रंज , रंजिश , रंजय निरखकर , कलम से कर्ज उतारे जा रहे हैं। अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं, पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं। विरंजय १८/११/२०२५
किसानों पर सरकार द्वारा अत्याचार
अखिल भारतीय किसान सघर्ष समन्वय समिति द्वारा सरकार के गैर जिम्मेदार मंत्रियों से हुयी वार्ता विफल होती नजर आ रही है | किसान आन्दोलन तेज होने के अन्देशा से सरकार प्रशासन ने शाहजहाँपुर बार्डर से दिल्ली जाते किसानों पर धारा 144 के उल्लंघन का हवाला देकर आंसू गैस और मिर्च पाउडर के गोले फेकें | सरकार किसानों के रुख से दहशत में है |
एआईकेएससीसी ने कहा है कि वरिष्ठ मंत्री नितिन गडकरी ने किसानों की मांगों पर जो बात वार्ता की पूर्व संध्या पर कही, इससे वार्ता की सफलता की संभावना कम बचती है। गडकरी ने कल कहा कि मूल समस्या है कि खाने का उत्पादन बहुत ज्यादा है और एमएसपी खुले बाजार से ऊँचा है। सच यह है कि भारत में जनसंख्या का बड़ा हिस्सा भूख से पीड़ित है और आरएसएस-भाजपा की सरकार उनके प्रति संवेदनहीन है। जिनके पेट भरे हुए हैं वे समझते हैं कि भारत में खाने के उत्पादन को घटा देना चाहिए। दुनिया के भूखे देशों की सूची भारत का दर्जा हर साल गिरता जा रहा है। उसका माप 2000 में 38.8 था जो 2019 में गिर कर 30.3 रह गया और 2020 में 27.2। इन तथ्यों से अपरिचित और कारपोरेट लूट को समर्थन देने में प्रतिबद्ध व बेपरवाह मंत्री कह रहे हैं कि भारत में खाना जरूरत से ज्यादा है |
सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी से भागना चाहती है, और किसानों को खुले बाजार में कृषि उत्पादों को बेचने के लाभ बता रही है | नतीजा यह निकलेगा कि किसान उद्योगपतियों का कठपुतली बनकर रह जाएगा , जब फसल किसान के पास होगी तो कम मूल्य पर खरीदकर और भण्डारित करने के उपरांत मनमाने मूल्य पर बेचेंगे उद्योगपति | इससे न किसान को लाभ होगा और नहीं आमजन लाभान्वित होंगे |
जय किसान
यह लेख बिल्कुल तथ्यविहीन है। और यह दर्शाता है कि आपके पास तथ्यों की कमी है।
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