नवका साल के नामे चिट्ठी प्रिय नवका साल सादर प्रणाम का हो साल तू केतना जल्दी बीत गईला कुछ समझ में ना आइल लोग कहत रहलन की साल दर साल उमर बढ़त गईल लेकिन , हम त कहत बानी की उमर बढ़ल त ना घट गईल , बाकि प्रकृति क नियम ह की क्षतिपूर्ति जरुर करे ले उमर त घटल बाकि अनुभव बढ़ गईल | लोगन के चेहरा पढ़े क हुनर भी मिलल , कुछ लोग कहलन की तू बदल गईला हमके त न बुझाइल की हम बदल गइनी लेकीन ह , इ जरुर कहब की समय की बदलत नब्ज़ के हम ना नकार पवनी आ , दायित्व निभावे में हम एइसन अंझुरा गइनी की बदलाव समझे ही ना पवनी आ धीरे -धीरे बाल आ खाल के रंग भी बदले लागल | लेकिन ,समय अइसन मुट्ठी से सरकल की कुछ समझे ना आइल | लोग सबेरे से कहे शुरु कइलन की हैप्पी न्यू ईयर , अब हम उनके का बताईं की हैप्पी त लोग तब होखेला जब अपना साथ कुछ बढ़िया होखे ला , हम का बताई खाली भर , बरिस के पीछे क अंक बदले पर एतना हल्ला मचत बा - की का बताईं , इ खाली बाजार आ टीबी अउर व्हाट्स अप्प विश्व विद्यालय क फइलावल रायता ह , सरकार के भी फायदा बा -लोग कई अरब के त मदिरा पी जात बा...
गांव छोड़ के आइल बानी
बरिस दिन के दिन रहे ई ,
सगरो से अच्छा सीन रहे ई ,
नोकरी, रोटी, स्वारथ में एतना हम अंझुराइल बानी ,
सोन चिरइया गांव आपन हम अहकत छोड़ के आइल बानी |
छान्ही की एक ओरियानी चोंचा घर बनावत ई,
एक ओरियानी घात लगा के कबूतर खर जुटावत ई ,
बीच बड़ेरा ठोरे -ठोरे फुर्गुदी क खोंता तर सझुराइल बानी ,
सोन चिरइया गांव आपन हम अहकत छोड़ के आइल बानी |
फगुआ में फाग बिसर गईल ,
चैति में उ चैता ,
कजरी के उ राग रहे का , सब कुछ हम भुलाइल बानी ,
सोन चिरइया गांव आपन हम अहकत छोड़ के आइल बानी |
मसूरी रहे कटत अभी त ,
गेंहूं बस गदराइल बा ,
उम्ही ,गदरा , होरहा ,कचरस पाके बस अगराइल बानी,
सोन चिरइया गांव आपन हम अहकत छोड़ के आइल बानी |
सगरो सिवान हरियरे बाटे ,
आम मउर अब लागत बाटे,
सूखल देख के हरदी के गावा ,
हमहूं अब झुराईल बानी,
सोन चिरइया गांव आपन हम अहकत छोड़ के आइल बानी |
गांव से होरहा (भूना चना)
गांव के गेंहूं के खेत
बुतरु और गोलू ,निखिल कैंची साइकिल चलाते
Holi song गांव के होली गीत फगुआ





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