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नया वर्ष के नाम पत्र

 नवका साल के नामे चिट्ठी  प्रिय नवका साल  सादर प्रणाम      का हो साल तू केतना जल्दी बीत गईला कुछ समझ में ना आइल लोग कहत रहलन की साल दर साल उमर बढ़त गईल लेकिन , हम त कहत बानी की उमर बढ़ल त ना घट गईल , बाकि प्रकृति क नियम ह की क्षतिपूर्ति जरुर करे ले उमर त घटल बाकि अनुभव बढ़ गईल | लोगन के चेहरा पढ़े क हुनर भी मिलल , कुछ लोग कहलन की तू बदल गईला हमके त न बुझाइल की हम बदल गइनी लेकीन ह , इ जरुर कहब की समय की बदलत नब्ज़ के हम ना नकार पवनी आ , दायित्व निभावे में हम एइसन अंझुरा गइनी की बदलाव समझे ही ना पवनी आ धीरे -धीरे बाल आ खाल के रंग भी बदले लागल | लेकिन ,समय अइसन मुट्ठी से सरकल की कुछ समझे ना आइल | लोग सबेरे से कहे शुरु कइलन की हैप्पी न्यू ईयर , अब हम उनके का बताईं की हैप्पी त लोग तब होखेला जब अपना साथ कुछ बढ़िया होखे ला , हम का बताई खाली भर , बरिस   के पीछे क अंक बदले पर एतना हल्ला मचत बा - की का बताईं , इ खाली बाजार आ टीबी अउर व्हाट्स अप्प विश्व विद्यालय क फइलावल रायता ह , सरकार के भी फायदा बा -लोग कई अरब के त मदिरा पी जात बा...

हवा में महल

 हवा में  महल

(किस्से अकबर-बीरबल के)

एक बार  बादशाह अकबर ने बीरबल से कहा-

अकबर -  बीरबल !
बीरबल -  जी जहापनाह |
अकबर -  हवा में  महल बनवाओ |
बीरबल -  हुजूर कहां सम्भव  है |
अकबर -  खबरदार  शाही फरमान की अवहेलना करने पर सर कलम कर दिया  जाएगा |

   इतना सुनने के बाद बीरबल ने मन में  सोचा कि अगर मैं  न मानू तो नाहक मारा जाऊंगा 
तो बीरबल ने ,बादशाह हुकूमत की बात स्वीकार करते हुए  कहा -

 बीरबल - हुजूर खर्च  तो बहुत  आएगा  और  महल आसमान में  बनेगा |

अकबर -  हां आसमान में बनाओ ,खर्च जितना आए खजाने से मुहैया कराया जाए |
बीरबल ने खजाने से धन प्राप्त करते हुए ,पक्षी -पालक को बुलाया और  निर्देशित किया कि प्रशिक्षण हेतु  एक हजार तोते लाए जाए ,उनके  प्रशिक्षण और  देख-रख
 में यह धन खर्च किया  जाए  और  उन्हें  ऐसा  प्रशिक्षित किया जाए  कि बादशाह सलामत जैसा व्यक्ति  देखते ही सभी तोते एक सुर में  कहना शुरू करें -

"चले गारा ,चले माटी ,चले ईंटा  

पक्षी पालक ने ऐसा ही किया  बादशाह अकबर की  तस्वीर रखकर  और  तोतों को प्रशिक्षित करना शुरू किया  
सभी तोते  अब सीख गये -


"चले गारा ,चले माटी ,चले ईंटा  "

अब बादशाह जैसे ही महल से बाहर निकलते 
सभी पक्षी चहचहा कर शुरू करते -

"चले गारा ,चले माटी ,चले ईंटा  "



अब परेशान होकर  बादशाह  अकबर ने कहा
बीरबल !
बीरबल - जी जहा पनाह |
अकबर - ये पक्षी क्या नारा लगा रहे है ?
बीरबल - बादशाह सलामत ,ये पक्षी हवा में  बन रहे महल की प्रगति  बयां कर रहे हैं  | निर्माणाधीन महल  इनकी पहुंच  में है और  ये उसी का गुणगान कर रहे हैं  |
      बादशाह  ने गदगद मन से कहा-
बहुत खूब ,महल का काम कैसा चल रहा है ?

बीरबल - हुजूरे आला ,काम शानदार, लागातर, धुआंधार चल रहा है। 
अकबर -  बीरबल यह महल कब तक बन जाएगा  ?
बीरबल - जहापनाह यही तो तय नहीं है  |
    पर काम  शानदार, लागातर, धुआंधार चल रहा है। 

कथा मर्म -

वर्तमान में कई राज्यों  के राजा उसी तरह के  हैं और  उनका विकास भी  उसी तरह  से --

 शानदार, लागातर, धुआंधार चल रहा है। 








    


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