नवका साल के नामे चिट्ठी प्रिय नवका साल सादर प्रणाम का हो साल तू केतना जल्दी बीत गईला कुछ समझ में ना आइल लोग कहत रहलन की साल दर साल उमर बढ़त गईल लेकिन , हम त कहत बानी की उमर बढ़ल त ना घट गईल , बाकि प्रकृति क नियम ह की क्षतिपूर्ति जरुर करे ले उमर त घटल बाकि अनुभव बढ़ गईल | लोगन के चेहरा पढ़े क हुनर भी मिलल , कुछ लोग कहलन की तू बदल गईला हमके त न बुझाइल की हम बदल गइनी लेकीन ह , इ जरुर कहब की समय की बदलत नब्ज़ के हम ना नकार पवनी आ , दायित्व निभावे में हम एइसन अंझुरा गइनी की बदलाव समझे ही ना पवनी आ धीरे -धीरे बाल आ खाल के रंग भी बदले लागल | लेकिन ,समय अइसन मुट्ठी से सरकल की कुछ समझे ना आइल | लोग सबेरे से कहे शुरु कइलन की हैप्पी न्यू ईयर , अब हम उनके का बताईं की हैप्पी त लोग तब होखेला जब अपना साथ कुछ बढ़िया होखे ला , हम का बताई खाली भर , बरिस के पीछे क अंक बदले पर एतना हल्ला मचत बा - की का बताईं , इ खाली बाजार आ टीबी अउर व्हाट्स अप्प विश्व विद्यालय क फइलावल रायता ह , सरकार के भी फायदा बा -लोग कई अरब के त मदिरा पी जात बा...
#उसके उन्नयन से प्रस्थान तक #
अब रितेश की शिकायतें धक्का - मुक्की तक तथा छीना - छपटी तक ही सीमित रह गईं थीं, परन्तु अभी भी पूरे विद्यालय में किसी की पेन, पेंसिल अथवा कापी - किताब भूल जाती तो रितेश के बस्ते के निरीक्षण की अपील जोर पकड़ लेती और यह जानते हुए भी की उसके पास अमुक वस्तु नहीं है उसकी तलाशी लेनी होती और उसके पास वह सामान नहीं मिलता लेकिन पूर्व की आदत से वह बदनाम था !
तबतक संस्था के प्रधानाध्यापक भी आ चुके थे और उनका भरपूर सहयोग प्राप्त हो रहा था! प्रधानाध्यापक महोदय के साथ अब पूरे स्टाफ के लोगों को रितेश में सब बच्चों के समान प्रतिभा दिखने लगी थी!
अब धीरे - धीरे रितेश अपने कक्षा के स्तर व पाठ्यक्रम की सभी समस्याओं को हल कर लेता और हिन्दी के साथ अंग्रेजी भी सही से पढ़ लेता, परन्तु कला में अब भी वह रुचि नहीं ले रहा था , लेकिन लिखावट में अपेक्षित सुधार हो गया था! वह खेल में तथा वाह्य क्रियाओं में चढ -बढ कर हिस्सा लेता परन्तु शारीरिक क्षमता अनुरूप पिछड़ जाता परन्तु हारता नहीं!
खाना खाते समय उदण्डता अवश्य करता, यह सब करते - धरते रितेश कक्षा पांच में बढ़ गया! अब रितेश को सभी राज्य -राजधानी बीस तक पहाड़ा तथा अपने पाठ्यक्रम व स्तर का सब कुछ उसे याद था !
जो सबको खुश करता था, परन्तु शरारत अभी भी कर बैठता था.... इस तरह अब रितेश सारी खूबियों के साथ कक्षा पांच उत्तीर्ण हुआ और हमें आत्मिक संतोष.....अब वह अगले स्कूल और हम ..............अगले डमरू के साथ मशगूल.पढने के लिए यहाँ क्लिक करें- मेरे प्रयोग "डमरू" से सामना
THE END
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