नवका साल के नामे चिट्ठी प्रिय नवका साल सादर प्रणाम का हो साल तू केतना जल्दी बीत गईला कुछ समझ में ना आइल लोग कहत रहलन की साल दर साल उमर बढ़त गईल लेकिन , हम त कहत बानी की उमर बढ़ल त ना घट गईल , बाकि प्रकृति क नियम ह की क्षतिपूर्ति जरुर करे ले उमर त घटल बाकि अनुभव बढ़ गईल | लोगन के चेहरा पढ़े क हुनर भी मिलल , कुछ लोग कहलन की तू बदल गईला हमके त न बुझाइल की हम बदल गइनी लेकीन ह , इ जरुर कहब की समय की बदलत नब्ज़ के हम ना नकार पवनी आ , दायित्व निभावे में हम एइसन अंझुरा गइनी की बदलाव समझे ही ना पवनी आ धीरे -धीरे बाल आ खाल के रंग भी बदले लागल | लेकिन ,समय अइसन मुट्ठी से सरकल की कुछ समझे ना आइल | लोग सबेरे से कहे शुरु कइलन की हैप्पी न्यू ईयर , अब हम उनके का बताईं की हैप्पी त लोग तब होखेला जब अपना साथ कुछ बढ़िया होखे ला , हम का बताई खाली भर , बरिस के पीछे क अंक बदले पर एतना हल्ला मचत बा - की का बताईं , इ खाली बाजार आ टीबी अउर व्हाट्स अप्प विश्व विद्यालय क फइलावल रायता ह , सरकार के भी फायदा बा -लोग कई अरब के त मदिरा पी जात बा...
मन की गलतफहमी
एक दिन माँ का फोन आया, फोन पर माँ ने ऐसी खबर सुनाई की मेघना झूम उठी , माँ ने कहा शिशिर की शादी सिमरन से तय हो गयी है, जो अगले माह है, लड़की शिशिर को भी पसंद आ गयी है! अगले महीने शिशिर और सिमरन की शादी धूमधाम से हुई, मेघना भी अपनी एक वर्ष की बिटिया के साथ आई और शादी के सभी रश्मों में शरीक़ हुई, परन्तु अपने घर में अकेले होने के कारण उसे जल्दी ही जना पड़ा! इधर शिशिर और सिमरन का वैवाहिक जीवन सही से चलने लगा! परन्तु शिशिर के आर्मी में होने के कारण छुट्टी समाप्त कर जल्दी ही भटिंडा बार्डर चला गया जहाँ उसकी पोस्टिंग थी!
बार्डर की ड्यूटी होने के कारण सिमरन न जा सकी वह माँ के साथ घर पर रह गयी !
मेघना माँ से कुछ दिन अन्तराल पर फोन से बात कर सब समाचार प्राप्त कर लेती , एक दिन मेघना ने माँ से पूछा भाभी क्या कर रही हैं, तो माँ ने कहा टीवी देख रही होगी, काम ही क्या है बस नाश्ता बनाना होता है, कामवाली है, कुछ काम मैं भी कर लेती हूँ! मेघना ने कहा माँ भाभी से कहो कहीं पार्ट टाइम जाब ढूँढ ले ताकि उसका मन लगा रहेगा और अकेलापन भी दूर हो जाएगा, तुम बात करके बताना मैं सहयोग करुंगी अगर वह तैयार होंगी तो, माँ ने कहा ठीक है मैं बात करके फोन करुंगी!
इसके बाद मेघना अपनी बेटी और व्यस्तता के कारण फोन न कर सकी और माँ का भी कोई फोन न आया!
एक दिन अचानक फोन की घण्टी बजी उधर से माँ की आवाज थी सब समाचार होने के बाद मेघना ने माँ से पूछा क्या आप ने भाभी से बात
की माँ ने कहा हां वही बताने के लिए फोन की हूँ, उस दिन बहू हमलोगों की फोन पर हो रही बात सुन रही थी और अगले दिन कामवाली को हटा दी और सारे काम स्वयं करने लगी ! मेघना ने कहा उन्हें गलतफहमी हो गई होगी आपने उनसे बात करके गलतफहमी दूर क्यों नहीं की , माँ ने कहा मैंने उससे बात की और उसकी गलतफहमी दूर की पूरी बात बताई तो वह समझदार है समझ गयी और उसकी एक टीचर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में एडमिशन भी करा दी हूं !
तो ध्यान रखें गलतफहमी न रखें बातचीत से दूर कर लें, कम्यनिकेशन गैप न करें, बातचीत करें मनमुटाव न रखें...
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Nice
ReplyDeleteउत्साह वर्धन हेतु धन्यवाद
Deleteप्रेरणादायक प्रसंग। बहुत ही अच्छा प्रयास।
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