गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं, पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं। जरूरत है सियासत की , लोगों को प्रशिक्षित कर , गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं। तुम्हारी कौम क्या है , गोत्र क्या है , असलीयत क्या है , बे -वजह उचारे जा रहे हैं। सजग रहना ऐ मूल निवासियों, तुम्हारे बीच से , विभीषण निकाले जा रहे हैं। विविधता में एकता से , हलकान है सियासत , गुच्छे में बंधे विचार, बे खौफ पसारे जा रहे हैं। रंज , रंजिश , रंजय निरखकर , कलम से कर्ज उतारे जा रहे हैं। अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं, पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं। विरंजय १८/११/२०२५
गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं
अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं,
पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं।
जरूरत है सियासत की ,
लोगों को प्रशिक्षित कर ,
गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं।
तुम्हारी कौम क्या है , गोत्र क्या है ,
असलीयत क्या है ,
बे -वजह उचारे जा रहे हैं।
सजग रहना ऐ मूल निवासियों,
तुम्हारे बीच से ,
विभीषण निकाले जा रहे हैं।
विविधता में एकता से ,
हलकान है सियासत ,
गुच्छे में बंधे विचार,
बे खौफ पसारे जा रहे हैं।
रंज , रंजिश , रंजय निरखकर ,
कलम से कर्ज उतारे जा रहे हैं।

Gare murde ukhade ja rahe hai 💯
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