गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं, पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं। जरूरत है सियासत की , लोगों को प्रशिक्षित कर , गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं। तुम्हारी कौम क्या है , गोत्र क्या है , असलीयत क्या है , बे -वजह उचारे जा रहे हैं। सजग रहना ऐ मूल निवासियों, तुम्हारे बीच से , विभीषण निकाले जा रहे हैं। विविधता में एकता से , हलकान है सियासत , गुच्छे में बंधे विचार, बे खौफ पसारे जा रहे हैं। रंज , रंजिश , रंजय निरखकर , कलम से कर्ज उतारे जा रहे हैं। अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं, पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं। विरंजय १८/११/२०२५
भोजपुरी शब्द संसार
भोजपुरी अपने आप में समृद्ध साहित्य और विभेदित शब्द चयन की विधा समेटे हुए है , अन्य भाषाओं की तुलना में भोजपुरी का शब्द संसार प्रयोग की दृष्टि से विशाल और व्यापक है , हर शब्द का अलग भाव और बोलते समय विभेदित भावभंगिमा भी होती है , जिसका प्रयोग चिकित्सा क्षेत्र में शब्द समझ रखने वाले चिकित्सक से साझा कर रोग निदान में कर सकते हैं।
जैसे अंग्रेजी के Pain (दर्द )की भोजपुरी व्याख्या और शब्द प्रयोग |
अंग्रेजी के पेन (pain) दर्द का भोजपुरी शब्द विभेद -
शरीर में कही पीड़ा हो तो अंग्रेजी में उसे पेन (pain )कह कर हम उसे व्यक्त करते हैं, परन्तु भोजपुरी भाषी लोगों की हर पीड़ा का अलग भाव प्रदर्शन है ...
जैसे ...
दरद बा
बथत बा
बेधत बा
छेदत बा
गड़त बा
चुभत बा
टभकत बा
तलफत बा
भभात बा
छर छरात बा
परपरात बा
झिन झिनात बा
अंगरत बा
चनकत बा
बनबनात बा
इन शब्दों का प्रयोग अलग -अलग प्रकार की पीड़ा के लिए होता है |
यह भोजपुरी की समृद्ध परम्परा के लिए शब्द प्रयोग है ||

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