गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं, पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं। जरूरत है सियासत की , लोगों को प्रशिक्षित कर , गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं। तुम्हारी कौम क्या है , गोत्र क्या है , असलीयत क्या है , बे -वजह उचारे जा रहे हैं। सजग रहना ऐ मूल निवासियों, तुम्हारे बीच से , विभीषण निकाले जा रहे हैं। विविधता में एकता से , हलकान है सियासत , गुच्छे में बंधे विचार, बे खौफ पसारे जा रहे हैं। रंज , रंजिश , रंजय निरखकर , कलम से कर्ज उतारे जा रहे हैं। अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं, पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं। विरंजय १८/११/२०२५
डॉ० झबलू राम का अपने पैतृक क्षेत्र पहुंचने पर हुआ स्वागत
डॉ० झबलू को भारत सरकार द्वारा हिन्दी भाषा सलाहकार समिति का सदस्य नामित किए जाने के उपरांत पहली बार अपने पैतृक गांव करकटपुर गाजीपुर पहुंचे थे | एक विशेष प्रोटोकॉल के तहत उनका रुट निर्धारित था | थाना प्रभारी करीमुद्दीनपुर मय फोर्स उपस्थित रहे | क्षेत्र के लोग भरौली, विशम्भरपुर, दुबिहांमोड़ पर फूल मलाओं
से डा० झबलू का स्वागत किए पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर थी |
डॉ झबलू राम(Dr. Jhablu Ram ) को गृह मंत्रालय,भारत सरकार,राजभाषा विभाग, एवं दूर संचार विभाग,संचार मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा हिन्दी सलाहकार समिति का सदस्य नामित किया गया है।ये मूल रूप से ग्राम- करकटपुर,पोस्ट-भरौली कलां,थाना-करीमुद्दीनपुर, जिला-गाजीपुर (उ.प्र.)के रहने वाले है।इनकी प्रारम्भिक शिक्षा हार्टमन ईण्टर कालेज हार्टमनपुर गाजीपुर से व 10 वीं 12 वीं की पढ़ाई जनता जनार्दन इण्टर कॉलेज, गांधी नगर, गाजीपुर से हुई उसके बाद काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी से बैचलर , मास्टर डिग्री (2008),UGC नेट, एवं शोध कार्य (हिन्दी दलित आत्मकथाओं का समाजशास्त्रीय अध्ययन)विषय पर प्रो बिपिन कुमार के निर्देशन में हिन्दी विभाग, BHU से की है।इनको हिन्दी के क्षेत्र में तीन राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।लगभग दो दर्जन शोध पत्र देश की प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुका है।लगभग 13 अंतरराष्ट्रीय सेमिनार , लगभग35 राष्ट्रीय सेमिनार एवं 9 राष्ट्रीय कार्यशाला में अपना पत्र प्रस्तुत कर चुके है।

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