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गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं

गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं  अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं,   पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं।  जरूरत है सियासत की ,  लोगों  को प्रशिक्षित कर , गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं।  तुम्हारी कौम क्या है , गोत्र क्या है ,  असलीयत क्या है , बे -वजह उचारे जा रहे हैं।  सजग रहना ऐ मूल निवासियों,  तुम्हारे बीच से  ,          विभीषण निकाले जा रहे हैं। विविधता में एकता से , हलकान है सियासत , गुच्छे में बंधे विचार,  बे खौफ पसारे जा रहे हैं।  रंज , रंजिश , रंजय निरखकर , कलम से कर्ज उतारे जा रहे हैं।  अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं,   पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं।     विरंजय १८/११/२०२५

प्रबोधनी एकादशी या देव उठायनी एकादशी

प्रबोधनी एकादशी या देव उठायनी  एकादशी

             कार्तिक शुक्ल एकादशी को पद्मपुराण में देवप्रबोधिनी एकादशी कहा गया है। इस एकादशी को देवउठनी और देवउठानी और हरिप्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस एकादशी के सभी नाम का अर्थ एक ही है भगवान का नींद से जगना। भगवान विष्णु इस दिन चार महीने के शयन के बाद योगनिद्रा से जगते हैं। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप का देवी तुलसी के साथ विवाह हुआ था। इसलिए इस एकादशी का साल के सभी 24 एकादशी में विशेष महत्व है।

ऐसा कहा जाता है अथवा शास्त्रों में उल्लेख है कि
एकादशी के व्रत से मिलती है पाप कर्मों से छूट
इस दिन देवी-देवता भी एकादशी का व्रत रखते हैं। पद्मपुराण में बताया गया है कि इस एकादशी के व्रत से मनुष्य पाप कर्मों से छूट जाता है और मुक्ति पा जाता है। लेकिन इस साल देवप्रबोधिनी एकादशी की तिथि को लेकर उलझन की स्थिति है क्योंकि 25 और 26 नवंबर दोनों ही दिन एकादशी तिथि है। आइए जानें किस दिन एकादशी व्रत करना होगा आपके लिए सही।
इस वर्ष 
देवशयनी एकादशी पर उलझन की स्थिति की वजह यह है कि इस वर्ष 24 नवंबर को रात 2 बजकर 43 मिनट से एकादशी तिथि लग रही है जो 25 तारीख को दिन रात रहेगी और 26 तारीख को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी। इसके बाद 5 बजकर 12 मिनट से द्वादशी तिथि लगेगी जो 27 तारीख को 7 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी। इससे द्वादशी तिथि की वृद्धि हो गई है|
किन हालातों में तुलसी का विवाह हुआ शालीग्राम से, जाने यह रोचक प्रकरण.. 
जानें एकादशी की सही तिथि
शास्त्रों में बताया गया है कि वैष्णव लोग यानी जिन्होंने किसी गुरु से वैष्णव मंत्र लिया है या साधु संत हैं वह द्वादशी युक्त एकादशी में व्रत करें। जबकि अन्य लोगों को जिस दिन सुबह एकादशी तिथि लग रही हो उस दिन व्रत करना चाहिए और द्वादशी तिथि के आरंभ में भोजन ग्रहण करना चाहिए। इस नियम के अनुसार 25 नवंबर को गृहस्थ लोगों को व्रत करना चाहिए और 26 नवंबर को साधु संतों और वैष्णव लोगों को देवप्रबोधिनी एकादशी का व्रत करना चाहिए।
गन्ना पूजन का विशेष महत्व.. 
इस एकादशी को ईख की पूजा का विशेष महात्म्य है, किसान इसी दिन से गन्ना की कटाई, पेराइ शुरू करता है, इस दिन से गृहस्थ लोग गन्ना का नेवान अर्थात गन्ना को चूसने से लेकर गुड़ बनाने की प्रक्रिया का शुभारंभ कर देते हैं! 
तुलसी और शालीग्राम के विवाह हेतु मण्डप ईख से ही बनता है, तुलसी चौरा सजाया जाता है और पूजन का विधि -विधान शुरू होता है.... 


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!!उ कहाँ गइल!!  रारा रैया कहाँ गइल,  हउ देशी गैया कहाँ गइल,  चकवा - चकइया कहाँ गइल,         ओका - बोका कहाँ गइल,        उ तीन तड़ोका कहाँ गइल चिक्का  , खोखो कहाँ गइल,   हउ गुल्ली डण्डा कहाँ गइल,  उ नरकट- कण्डा कहाँ गइल,           गुच्ची- गच्चा कहाँ गइल,           छुपा - छुपाई कहाँ गइल,   मइया- माई  कहाँ गइल,  धुधुका , गुल्लक कहाँ गइल,  मिलल, भेंटाइल  कहाँ गइल,       कान्ह - भेड़इया कहाँ गइल,       ओल्हापाती कहाँ गइल,  घुघुआ माना कहाँ  गइल,  उ चंदा मामा कहाँ  गइल,      पटरी क चुमउवल कहाँ गइल,      दुधिया क बोलउल कहाँ गइल,   गदहा चढ़वइया कहाँ गइल,   उ घोड़ कुदइया कहाँ गइल!!                  Copy@viranjy