गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं, पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं। जरूरत है सियासत की , लोगों को प्रशिक्षित कर , गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं। तुम्हारी कौम क्या है , गोत्र क्या है , असलीयत क्या है , बे -वजह उचारे जा रहे हैं। सजग रहना ऐ मूल निवासियों, तुम्हारे बीच से , विभीषण निकाले जा रहे हैं। विविधता में एकता से , हलकान है सियासत , गुच्छे में बंधे विचार, बे खौफ पसारे जा रहे हैं। रंज , रंजिश , रंजय निरखकर , कलम से कर्ज उतारे जा रहे हैं। अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं, पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं। विरंजय १८/११/२०२५
किसान बिल जो किसान विरोधी है ,उसको वापस लेने के लिए सम्पूर्ण देश में आन्दोलन किए जा रहे हैं, उन आन्दोलनों का नेतृत्व किसान कर रहे हैं, कुछ जगह नेता कुछ जगह सामाजिक कार्यकर्ता अब बात यह है कि यह आन्दोलन जायज तो है परन्तु किसान अपने हक को अभी तक जान नहीं पाया है, और जो जान गया है अपने स्तर से छटपटा रहा है, लेकिन सत्ता पक्ष अपने स्तर गुमराह करने करने की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता! जिसके कारण किसान आन्दोलन की क्रांति फुटकर में अर्थात छिटपुट हो रही है जो अपनी प्रकृति तथा सत्ता पक्ष की दमनकारी नीति व बिल की सट्टेबाजी जिद और विपक्ष की कमजोरी रणनीति के कारण दम तोड़ती नज़र आ रही है,
सबसे सशक्त आवाज पंजाब और हरियाणा किसानों की है, उसमें सामाजिक कार्यकर्ता व मूवमेंट तथा सिद्धांत आधारित राजनैतिक दल के संस्थापक माननीय योगेन्द्र यादव जी सबसे मुखर हैं, और प्रतिदिन सोशल साइट्स के सभी संस्करणों पर आकर किसानों को जागरूक करना तथा प्रतिदिन सभाओं में शरीक़ होना बेहद संघर्ष पूर्ण है!
आज उनको हरियाणा पुलिस ने हिरासत में ले लिया जब वे किसानों के साथ हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को घेरने का प्रयास कर रहे थे!
उनकी गिरफ्तारी अत्यंत शर्मनाक व निन्दनीय है!
परन्तु इस आन्दोलन को सफल करने के लिए सभी किसान संगठनों को एक साथ एक मंच पर आना होगा, क्योंकि प्रखर समाजवादी चिंतक डा० राममनोहर लोहिया ने कहा था " क्रांति टुकड़ो से नही बल्कि सामूहिक एकता से ही किया जा सकता है"....
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