नवका साल के नामे चिट्ठी प्रिय नवका साल सादर प्रणाम का हो साल तू केतना जल्दी बीत गईला कुछ समझ में ना आइल लोग कहत रहलन की साल दर साल उमर बढ़त गईल लेकिन , हम त कहत बानी की उमर बढ़ल त ना घट गईल , बाकि प्रकृति क नियम ह की क्षतिपूर्ति जरुर करे ले उमर त घटल बाकि अनुभव बढ़ गईल | लोगन के चेहरा पढ़े क हुनर भी मिलल , कुछ लोग कहलन की तू बदल गईला हमके त न बुझाइल की हम बदल गइनी लेकीन ह , इ जरुर कहब की समय की बदलत नब्ज़ के हम ना नकार पवनी आ , दायित्व निभावे में हम एइसन अंझुरा गइनी की बदलाव समझे ही ना पवनी आ धीरे -धीरे बाल आ खाल के रंग भी बदले लागल | लेकिन ,समय अइसन मुट्ठी से सरकल की कुछ समझे ना आइल | लोग सबेरे से कहे शुरु कइलन की हैप्पी न्यू ईयर , अब हम उनके का बताईं की हैप्पी त लोग तब होखेला जब अपना साथ कुछ बढ़िया होखे ला , हम का बताई खाली भर , बरिस के पीछे क अंक बदले पर एतना हल्ला मचत बा - की का बताईं , इ खाली बाजार आ टीबी अउर व्हाट्स अप्प विश्व विद्यालय क फइलावल रायता ह , सरकार के भी फायदा बा -लोग कई अरब के त मदिरा पी जात बा...
प्रशिक्षण का सफल प्रयोग (डमरू)
मैंने प्रशिक्षण के दिनों में प्रशिक्षण गम्भीरता से लिया जिसमें गुरुजनों और सहपाठियों का विशेष योगदान रहा, अब बारी थी, अपने प्रशिक्षण के प्रयोग की, मेरी योग्यता व अर्हता अनुरूप मुझे प्रयोगशाला अथवा कर्मभूमि कहूँ मुझे प्राप्त हुई, जो मेरी जन्म भूमि से लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर दूर थी!
वह एक सरकारी प्राइमरी स्कूल था! कर्तव्य का निर्वाह अथवा प्रयोग एक निर्धारित मानक व नियमों के अन्तर्गत ही करना था ! हमारी संस्था प्रमुख एक व्यवसायिक व व्यवहार कुशल महिला थी , जिनसे कर्तव्य निर्वहन की व्यवहारिक कुशलता को बढ़ाने का सफल सहयोग मिला , कुछ दिन के हम लोगों के मार्गदर्शन के उपरांत उनका स्थानांतरण दूसरे विद्यालय में हो गया !
उस समय हम सभी लोगों को मिलाकर पांच का स्टाफ था, दो महिला दो पुरुष और एक प्रधानाध्यापिका महोदया!
कुछ सामान्य सी औपचारिकताओं के साथ
मैंने अपना सीखने- सीखाने का कार्य प्रारंभ कर दिया था!
सभी लोग अपने -अपने तरीके से कर्तव्य निर्वहन में कुशलता पूर्वक व्यस्त थे, तभी मेरा ध्यान एक ऐसे बालक के तरफ गया जो अपने प्रतिकूल व्यवहार के कारण मेरा ध्यान बरबस खींच रहा था!
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