गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं, पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं। जरूरत है सियासत की , लोगों को प्रशिक्षित कर , गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं। तुम्हारी कौम क्या है , गोत्र क्या है , असलीयत क्या है , बे -वजह उचारे जा रहे हैं। सजग रहना ऐ मूल निवासियों, तुम्हारे बीच से , विभीषण निकाले जा रहे हैं। विविधता में एकता से , हलकान है सियासत , गुच्छे में बंधे विचार, बे खौफ पसारे जा रहे हैं। रंज , रंजिश , रंजय निरखकर , कलम से कर्ज उतारे जा रहे हैं। अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं, पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं। विरंजय १८/११/२०२५
हाथरस में गैंग रेप एक ह्रदय विदारक
हाथरस की बेटी कहूँ या भारत की बेटी कहूँ, आरोपित भी तो भारत के ही हैं, गैंग रेप, जीभ काटना, रीढ़ की हड्डी तो भारत की टूटी है और छलनी हो रहा है, कलेजा हर बेटी वाले का, इसे किसी, दलित, पिछड़ा , गरीब या अमीर की आबरू कहूँ,
अब तो वो दम तोड़ दी, अब मोमबत्तियां लेकर निकलो, धरना दो लानत भेजो सरकारों को... पत्रकारों जमकर छापो अपने आकाओं, बापों के कहे शब्दों को.. जो आज किसी मीडिया ने नहीं दिखाया. क्योंकि उनके लिए सबसे बड़ी खबर है ही नहीं...
अस्मिता बेचो अपनी बहन - बेटियों की...
देखो और प्रतीक्षा करो अपने बारी की...
वहाँ मिलता है मेरा अपना ही बदन जख्मी,
जहाँ तीर से घायल कोई हिरन देखा,
अजीब है दुनिया की दास्ताँ,
सभी पे चलते समय एक सा कफ़न देखा,
जुबां है और ,बयां और ,उसका मतलब और,
अजीब आज की दुनिया का व्याकरन देखा,
लुटेरे- डाकू भी अपने पे नाज करने लगे,
उन्होंने आज जो "योगी" का आचरन देखा,,..
#hathrasgangrap
#बेटी_बचाओ
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