गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं, पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं। जरूरत है सियासत की , लोगों को प्रशिक्षित कर , गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं। तुम्हारी कौम क्या है , गोत्र क्या है , असलीयत क्या है , बे -वजह उचारे जा रहे हैं। सजग रहना ऐ मूल निवासियों, तुम्हारे बीच से , विभीषण निकाले जा रहे हैं। विविधता में एकता से , हलकान है सियासत , गुच्छे में बंधे विचार, बे खौफ पसारे जा रहे हैं। रंज , रंजिश , रंजय निरखकर , कलम से कर्ज उतारे जा रहे हैं। अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं, पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं। विरंजय १८/११/२०२५
कथित मर्दों के बीच मर्दानी, बंधुआ सांसदों के बीच एक सांसद ऐसी भी
पंजाब से चुन कर आयी लोक सभा सदस्य माननीया हरसिमरत सिंह कौर ने चौधरी चरण सिंह के बाद पहली बार किसान हित में इतना बड़ा फैसला लिया, किसान विरोधी बिल के पास होने पर खाद्य प्रसंस्करण मंत्री कैबिनेट स्तर से इस्तीफा दे कर एक मिसाल कायम की, आज भारत के कोने -कोने से किसान इनके इस साहसी फैसले का स्वागत कर रहा है,आज जब ब्लॉक प्रमुख, ग्राम प्रधान और वार्ड सदस्य के पद को बचाने के लिए लोग एड़ी -चोटी का जोर लगा दे रहे हैं, उस दौर में संसद में बैठे उन नामर्दो जिन्होंने इस किसान विरोधी बिल का प्रतिरोध करने का साहस न कर सके और मर्दानी ने इस्तीफा मुह पर दे मारा,
अब लोग कुतर्क कर रहे हैं कि राजनीति हो रही है, तो जितने लोग सदन में बैठे थे वे राजनीति नहीं सत्संग कर रहे थे,
और अगर किसान हित में राजनीति कर रही हैं, तो राजनीति ही सही, कुछ लोगों ने दलीलें दी की ये बिल कांग्रेस के समय का है, तो आप को कांग्रेस के बिल पास करने के लिए सरकार में लाया गया था? तब तो वही ठीक थे, अरे भाई आप को बढिया करने के लिए लाया गया था न की कांग्रेस वाली.. बाकी तो आप देख ही रहे हैं..
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