नवका साल के नामे चिट्ठी प्रिय नवका साल सादर प्रणाम का हो साल तू केतना जल्दी बीत गईला कुछ समझ में ना आइल लोग कहत रहलन की साल दर साल उमर बढ़त गईल लेकिन , हम त कहत बानी की उमर बढ़ल त ना घट गईल , बाकि प्रकृति क नियम ह की क्षतिपूर्ति जरुर करे ले उमर त घटल बाकि अनुभव बढ़ गईल | लोगन के चेहरा पढ़े क हुनर भी मिलल , कुछ लोग कहलन की तू बदल गईला हमके त न बुझाइल की हम बदल गइनी लेकीन ह , इ जरुर कहब की समय की बदलत नब्ज़ के हम ना नकार पवनी आ , दायित्व निभावे में हम एइसन अंझुरा गइनी की बदलाव समझे ही ना पवनी आ धीरे -धीरे बाल आ खाल के रंग भी बदले लागल | लेकिन ,समय अइसन मुट्ठी से सरकल की कुछ समझे ना आइल | लोग सबेरे से कहे शुरु कइलन की हैप्पी न्यू ईयर , अब हम उनके का बताईं की हैप्पी त लोग तब होखेला जब अपना साथ कुछ बढ़िया होखे ला , हम का बताई खाली भर , बरिस के पीछे क अंक बदले पर एतना हल्ला मचत बा - की का बताईं , इ खाली बाजार आ टीबी अउर व्हाट्स अप्प विश्व विद्यालय क फइलावल रायता ह , सरकार के भी फायदा बा -लोग कई अरब के त मदिरा पी जात बा...
उलझती जा रही आतंकी विकास दुबे की गुत्थी
दस पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारने वाला विकास दुबे आखिर कैसे फरार हो गया?क्या अभी भी किसी बड़े सफेदपोश का घनघोर संरक्षण प्राप्त है उसे,?
क्या वह उत्तर प्रदेश सरकार के पावर से अधिक पावरफुल है?
क्या माननीय मुख्यमंत्री जी अपना वोट मागते समय जनता से किया वादा भूल गए कि अपराधी या तो जेल के अंदर या प्रदेश से बाहर होंगे?
अरे नहीं मुख्यमंत्री जी को तो याद है, तभी तो आतंकी विकास दुबे दस पुलिस वालों (आठ मौका ए वारदात पर, दो अस्पताल में) की हत्या करने वाला सकुशल प्रदेश से बाहर चला जाता है और पूरा पुलिस प्रशासन ढूंढ रहा है!
पूर्ववर्ती सरकार में एक कद्दावर मंत्री जनाब आज़म खां की भैंस गुम होती है और दो दिन के भीतर खोज ली जाती है!
वर्तमान भाजपा के नेता माननीय रामशंकर कठेरिया का कुत्ता भूलता है और दोनों के भीतर ही पुलिस उसे ढूंढ निकालती है!
आखिर कौन सी मजबूरी है जो विकास को ढूंढने में आड़े आ रही है!
औरैया के पास मिली लावारिस ईकोस्पोर्ट कार यूपी 32 जीएल 9559 जो अमित तिवारी के नाम से पंजीकृत है, उसपर संघ परिवार लिखा होना ,उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव की एम्बेसडर कार का उसके घर मिलना इसका कनेक्शन ऊपर तक जोड़ रहा है!
उत्तर प्रदेश सरकार उसके घर और वाहनों का ध्वस्तीकरण करके जनता को फौरी संतुष्टि देना चाह रही है, जबकि ऐसा है नहीं!
उत्तरप्रदेश में जंगल राज कायम है, माननीय मुख्यमंत्री जी का मौन अखर रहा है,
जबतक विकास पकडा नहीं जाता और उसे फांसी नहीं होती तबतक जांबाज पुलिसकर्मियों की शहादत व्यर्थ है---
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