गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं, पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं। जरूरत है सियासत की , लोगों को प्रशिक्षित कर , गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं। तुम्हारी कौम क्या है , गोत्र क्या है , असलीयत क्या है , बे -वजह उचारे जा रहे हैं। सजग रहना ऐ मूल निवासियों, तुम्हारे बीच से , विभीषण निकाले जा रहे हैं। विविधता में एकता से , हलकान है सियासत , गुच्छे में बंधे विचार, बे खौफ पसारे जा रहे हैं। रंज , रंजिश , रंजय निरखकर , कलम से कर्ज उतारे जा रहे हैं। अब तो कागज , खंगाले जा रहे हैं, पोथियों में दफ्न पुरखे निकाले जा रहे हैं। विरंजय १८/११/२०२५
सन् 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के बहकावे/दबाव में आकर अखिलेश यादव का दिवाना भोजपुरी का अमिताभ बच्चन कहा जाने वाला निरहुआ ने अपना कैरियर बरबाद कर लिया अब उसकी फिल्में कम देखी जा रहीं थी, तभी उसने एक शानदार कजरी गीत प्रस्तुत किया "मोरी धनिया ना लिंक पर क्लिक करें और कजरी का आनंद लें...
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