नवका साल के नामे चिट्ठी प्रिय नवका साल सादर प्रणाम का हो साल तू केतना जल्दी बीत गईला कुछ समझ में ना आइल लोग कहत रहलन की साल दर साल उमर बढ़त गईल लेकिन , हम त कहत बानी की उमर बढ़ल त ना घट गईल , बाकि प्रकृति क नियम ह की क्षतिपूर्ति जरुर करे ले उमर त घटल बाकि अनुभव बढ़ गईल | लोगन के चेहरा पढ़े क हुनर भी मिलल , कुछ लोग कहलन की तू बदल गईला हमके त न बुझाइल की हम बदल गइनी लेकीन ह , इ जरुर कहब की समय की बदलत नब्ज़ के हम ना नकार पवनी आ , दायित्व निभावे में हम एइसन अंझुरा गइनी की बदलाव समझे ही ना पवनी आ धीरे -धीरे बाल आ खाल के रंग भी बदले लागल | लेकिन ,समय अइसन मुट्ठी से सरकल की कुछ समझे ना आइल | लोग सबेरे से कहे शुरु कइलन की हैप्पी न्यू ईयर , अब हम उनके का बताईं की हैप्पी त लोग तब होखेला जब अपना साथ कुछ बढ़िया होखे ला , हम का बताई खाली भर , बरिस के पीछे क अंक बदले पर एतना हल्ला मचत बा - की का बताईं , इ खाली बाजार आ टीबी अउर व्हाट्स अप्प विश्व विद्यालय क फइलावल रायता ह , सरकार के भी फायदा बा -लोग कई अरब के त मदिरा पी जात बा...
रेल का निजीकरण अनुचित
जी हाँ, 109 ट्रेनों का मतलब अपने डाउन मिलाकर 218 ट्रेनों का संचालन नीजी हाथों में सौंप दिया गया! एक तीन से अनेक निशाने साधे गए, पहला संचालन की योजना अमल में लाने और संचालित कराने वालों को नीजी कम्पनियां मोटी रकम देंगी जो विभिन्न सत्ताधारी हस्तियों के पास पहुंचेगा ये त्वरित लाभ!
दूसरा सरकारी रिक्रूटमेंट नहीं करना है बला टली तबेले की बला गधे के सिर!
तीसरा रिक्रूटमेंट में आरक्षण चुपके से समाप्त अभिजात्य वर्ग खुश!
जबकि ऐसा है नहीं सरकारी नौकरियों में आज भी अभिजात्य वर्ग का वर्चस्व अधिक है मुगालते में रहने की जरूरत नही है!
चौथा सरकार की जिम्मेदारी समाप्त!
अब नीजी कम्पनियों द्वारा मनमानी सुविधाएं और मनमानी वसूली!
अभी हाल ही में वन्दे भारत तथा तेजस जैसी नीजी ट्रेनें चलायी गयीं ये ट्रेनें जिस रुट पर जाती महत्वपूर्ण से महत्वपूर्ण सरकारी ट्रेनों को खड़ा करके इनको पास कराया जाता बस यह दर्शाने के लिए की नीजी ट्रेनें सही पटरी पर है, इन नीजी ट्रेनों में सफर महंगा भी है इसके यात्री हवाई जहाज़ से भी सफर कर सकते हैं! साथियों ये एक साजिश है रेलवे लाईन सरकारी परिचालन स्टाफ़ सरकारी और दौड़ रही है प्राइवेट ट्रेन इसमें बहुत बड़ा खेल हो रहा है! धीरे- धीरे सब प्राईवेट हो जाएगा!
शिक्षा सुविधाओं का निजीकरण, स्वास्थ्य सुविधाओं का नीजिकरण क्या सरकार निजी शिक्षण और स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों की मनमानी पर अंकुश लगा पाती है, नहीं!
तो भारत के सबसे बड़े आय के स्रोत और समरस की परिवहन व्यवस्था को नीजी हाथों में सम्पूर्ण रुप से सौंपने की साजिश की जा रही है, सतर्क होकर विरोध कीजिए! नहीं तो, शाइनिंग इण्डिया, मेक इन इंडिया, से लिमिटेड इण्डिया के तरफ कदम बढ़ा चुकी है सरकार! धन्यवाद
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