नवका साल के नामे चिट्ठी प्रिय नवका साल सादर प्रणाम का हो साल तू केतना जल्दी बीत गईला कुछ समझ में ना आइल लोग कहत रहलन की साल दर साल उमर बढ़त गईल लेकिन , हम त कहत बानी की उमर बढ़ल त ना घट गईल , बाकि प्रकृति क नियम ह की क्षतिपूर्ति जरुर करे ले उमर त घटल बाकि अनुभव बढ़ गईल | लोगन के चेहरा पढ़े क हुनर भी मिलल , कुछ लोग कहलन की तू बदल गईला हमके त न बुझाइल की हम बदल गइनी लेकीन ह , इ जरुर कहब की समय की बदलत नब्ज़ के हम ना नकार पवनी आ , दायित्व निभावे में हम एइसन अंझुरा गइनी की बदलाव समझे ही ना पवनी आ धीरे -धीरे बाल आ खाल के रंग भी बदले लागल | लेकिन ,समय अइसन मुट्ठी से सरकल की कुछ समझे ना आइल | लोग सबेरे से कहे शुरु कइलन की हैप्पी न्यू ईयर , अब हम उनके का बताईं की हैप्पी त लोग तब होखेला जब अपना साथ कुछ बढ़िया होखे ला , हम का बताई खाली भर , बरिस के पीछे क अंक बदले पर एतना हल्ला मचत बा - की का बताईं , इ खाली बाजार आ टीबी अउर व्हाट्स अप्प विश्व विद्यालय क फइलावल रायता ह , सरकार के भी फायदा बा -लोग कई अरब के त मदिरा पी जात बा...
उच्च शिक्षा आयोग बनाकर UGC समाप्त करने के लिए सरकार ने कसी कमर
फर्जी विश्वविद्यालयों पर लगाम लगाने के लिए व उच्च शिक्षा में गुणवत्ता के उन्नयन के लिए उठाया जाएगा यह कदम। इसके तहत यूजीसी नाम की संस्था अब खत्म हो जाएगी। इसकी जगह एचईसीआई (हायर एजुकेशन कमीशन आफ इंडिया) लेगा। लेकिन इसके पास विश्वविद्यालयों और कालेजों को वित्तीय मदद देने का अधिकार अब नहीं होगा। अब यह अधिकार सीधे मंत्रालय के पास होगा।
नए एक्ट के तहत एचईसीआई के पास फर्जी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में फर्जी डिग्री बांट रहे संस्थानों के खिलाफ सीधी कार्रवाई और मान्यता रद करने तक का अधिकार होगा। साथ ही अनियमितता बरतने वालों के खिलाफ जुर्माना और तीन साल की सजा का भी अधिकार होगा। वहीं नए एक्ट के तहत सभी विवि के लिए एक ही आयोग होगा। इनमें केंद्रीय विवि, राज्य विवि, निजी विवि, डीम्ड विवि आएंगे। जिनके लिए वह नियम और दिशा-निर्देश तय कर सकेंगे।
अभी निजी और डीम्ड जैसे विश्वविद्यालयों के लिए नियम मंत्रालय से तय होते है। इसके साथ ही एचईसीआई के दायरे में ऑनलाइन रेगुलेशन, नैक को मजबूती देने, विवि और कालेजों को स्वायत्ता, स्वयं पोर्टल सहित ओपन लर्निग रेगुलेशन आदि तय करने का भी काम होगा। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट कर इस बदलाव पर खुशी जताई और कहा कि इससे उच्च शिक्षा में चल रहे इंस्पेक्टर राज का भी खात्मा होगा। मौजूदा समय में मंत्रालय के पास विवि और कालेजों को ज्यादा ग्रांट देने और निरीक्षण के नाम पर भ्रष्टाचार से जुड़े मामले भी सामने आते रहे है। यही वजह है कि नए बदलाव के बाद गठित होने वाले एचईसीआई के पास वित्तीय अधिकार नहीं होगा। उसका फोकस सिर्फ विश्वविद्यालयों के पठन-पाठन और शोध क्षेत्र में किए जा रहे उसके काम-काज को लेकर रहेगा। इसके अलावा मान्यता जैसे विषयों का निराकरण ऑनलाइन किया जाएगा। इसके लिए एचईसीआई के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।
अनुमान के अनुसार ऐसी होनी है प्लानिंग।
नए एक्ट के तहत गठित होने वाले एचईसीआई में चेयरमैन, वाइस चेयरमैन के अलावा अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े 12 सदस्य भी होंगे। इसके साथ ही आयोग का एक सचिव भी होगा, जो सदस्य सचिव के रुप में काम करेगा। इन सभी की नियुक्ति केंद्र सरकार करेगी। चेयरमैन का चयन कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित एक चार सदस्यीय सर्च कमेटी करेगी। इनमें उच्च शिक्षा सचिव भी बतौर सदस्य शामिल होंगे।
नए एक्ट के तहत गठित होने वाले एचईसीआई में चेयरमैन, वाइस चेयरमैन के अलावा अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े 12 सदस्य भी होंगे। इसके साथ ही आयोग का एक सचिव भी होगा, जो सदस्य सचिव के रुप में काम करेगा। इन सभी की नियुक्ति केंद्र सरकार करेगी। चेयरमैन का चयन कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित एक चार सदस्यीय सर्च कमेटी करेगी। इनमें उच्च शिक्षा सचिव भी बतौर सदस्य शामिल होंगे।
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